हसीनो से मोहब्बत का बुरा अंजाम होता है

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गाना: हसीनो से मोहब्बत का बुरा अंजाम होता है
फिल्म: अलबेला(१९५१)
गायक: सी. रामचंद्र
गीत:
संगीत: सी. रामचंद्र


हो ..... हसीनो से मोहब्बत का 
आह .... हसीनो से मोहब्बत का, बुरा अंजाम होता है 
मेरी जान प्यार में घर बार भी नीलाम होता हैं - (4)
हसीनो से मोहब्बत का बुरा अंजाम होता हैं 
मेरी जान प्यार में घर बार भी नीलाम होता हैं 

हो .. कभी काजल की फरमाइश, कभी पावडर की फरमाइश 
कभी सर्कस की जिद्द हैं, और कभी थेअटर की फरमाइश 
निकलवाती हैं दिवाला, अजी दिलबर की फरमाइश 
कचेरी और ठाणे में बहुत ही नाम होता हैं - (2)
मेरी जान प्यार में घर बार भी नीलाम होता हैं 
हसीनो से मोहब्बत का बुरा अंजाम होता हैं 

हो .. (टक्के हो जेब में तो - 2), हुस्नवाले दिल लगाते हैं 
गले में डालकर बाहें, बड़ी उल्फत जताते हैं 
अगर आशीक हो कड़का, तो दूर से रास्ता दिखाते हैं 
हो जिसका बैंक में खता वही गुलफाम होता हैं 
मेरी जान प्यार में घर बार भी नीलाम होता हैं 
हसीनो से मोहब्बत का बुरा अंजाम होता हैं